Draupadi was bathing in river Yamuna. At some distance, a Sadhu was also taking bath. His Langoti,…
Draupadi was bathing in river Yamuna. At some distance, a Sadhu was also taking bath. His Langoti,…
द्रौपदी जमुना में स्नान कर रहीं थीं। दृष्टि दौड़ाई तो देखा कि कुछ दूर पर एक साधु…
संसार में जितनी प्रकार की श्रेष्ठ-शक्तियाँ हैं वे भगवान की प्रदान की हुई हैं । धन की शक्ति भी उन्हीं के द्वारा उत्पन्न की गई है और उन्होंने ‘लक्ष्मी’ के रूप में उसे संसार के कल्याणार्थ प्रेरित किया है । मनुष्य का कर्तव्य है कि इसे भगवान् की पवित्र धरोहर समझकर ही व्यवहार करे । इतना ही नहीं उसे इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यह शक्ति ऐसे लोगों के पास न जा सके जो इसका दुरुपयोग करके दूसरों का अनिष्ट करने वाले हों ।
Friends, Deva-DakSHiña- Thanksgiving to the gods- is an integral part of all yagyas – including the yug-yagyas…
घन इसलिए जमा करना चाहिए कि उसका सुदपयोग किया जा सके और उसे सुख एवं सन्तोष देने वाले कामों में लगाया जा सके, किन्तु यदि जमा करने की लालसा बढ़कर तृष्णा का रूप धारण कर ले और आदमी बिना घर्म-अघर्म का ख्याल किए पैसा लेने या आवश्यकताओं की उपेक्षा करके उसे जमा करने की कंजूसी का आदी हो जाय तो वह धन धूल के बराबर है । घन का गुण उदारता बढ़ाना है, हदय को विशाल करना है, कंजूसी या बेईमानी के भाव जिसके साथ सम्बद्ध हों, वह कमाई केवल दुःखदायी ही सिद्ध होगी ।
व्यक्ति को पहचानने की एक ही कसौटी है कि उसकी वाणी घटिया है या बढ़िया। व्याख्यान कला…
धन उचित अभावों की पूर्ति के लिए है, उसके द्वारा अहंकार तथा अनुचित कार्य नहीं किए जाने चाहिए । धन का उपार्जन केवल इसी दृष्टि से होना चाहिए कि उससे अपने तथा दूसरों के उचित अभावों की पूर्ति हो । शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के विकास के लिए सांसारिक उत्तरदायित्वों की पूर्ति के लिए घन का उपयोग होना चाहिए और इसीलिए उसे कमाना चाहिए ।
गायत्री का तीसरा अक्षर ‘स’ शक्ति की प्राप्ति और उसके सदुपयोग की शिक्षा देता हैसत्तावन्तस्ताथा शूराः क्षत्रिया…
A mong all the creatures of the world, man is considered to be of the highest form,…
The flow of life is constant and eternal. In this flow, every living being performs its assigned…