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धैर्य और स्थिरता

by Akhand Jyoti Magazine

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एक बार एक व्यक्ति चलते-चलते थक गया था। वह थका हुआ व्यक्ति पहाड़ी के नीचे चुपचाप खड़ा था । भेड़ चराने वाले लड़के अनुमान लगाने लगे कि वह किस कारण से खड़ा है ?

एक बोला- “उसका पालतू जानवर खो गया है, सो खोजने को नजर दौड़ा रहा है । “

दूसरा बोला- “साथी पीछे छूट गया है, सो इंतजार में है।” तीसरे ने कहा- “इधर से ले चलने योग्य कोई सौगात ले जाने के चक्कर में है।” असली वजह जानने के लिए तीनों उस खड़े व्यक्ति के पास पहुँचे।

उसने सोचते हुए उत्तर दिया- “जब चलने की शक्ति न रहे और बैठने योग्य स्थान न दीखे तो डगमगाने-गड़बड़ाने से अच्छा है कि किसी जगह शांत चित्त से उपाय सूझने तक चुपचाप खड़ा रहे।” किसी भी कठिनाई का हल धैर्य और स्थिर बुद्धि से निकाला जा सकता है। इससे आगे का मार्ग अपने आप दिखाई देने लगता है।

अमृत कण ( सचित्र बाल वार्ता )
युग निर्माण योजना , मथुरा

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