Home Health  ग्रीष्म ऋतु के दुष्प्रभाव से बचने के प्राकृतिक उपाय

 ग्रीष्म ऋतु के दुष्प्रभाव से बचने के प्राकृतिक उपाय

by Akhand Jyoti Magazine

 (1) सुबह उठते ही एक लीटर ठंढा पानी उषापान के रूप में पिएँ।

(2) सुबह-शाम ठंढे पानी से नहाएँ।

(3) तैरने का अभ्यास हो तो नदी-तालाब में तैरना भी शरीर और मन को तरोताजा बना देता है।

(4) मिट्टी के घड़े का ठंढा पानी पिएँ।

(5) सूती कपड़ों को पहनने से गरमी से थोड़ी राहत रहती है। सिंथेटिक वस्त्रों से त्वचा को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जिससे त्वचा के कई विकार भी पैदा होते हैं।

(6) नमक का सेवन कम मात्रा में करें।

(7) धूप में जाने से पूर्व सिर और कानों को सूती कपड़े से ढककर रखें एवं पर्याप्त ठंढा पानी पीकर ही घर से निकलें।

(8) गरम-मसालों का प्रयोग भोजन में कम ही करना चाहिए।

(9) नमकीन, मठरी, पूरी-कचौड़ी, समोसा, पकौड़ा, पराँठा आदि तले खाद्य अनावश्यक गरमी बढ़ाते हैं। अतः इन्हें गरमी के दिनों में न खाएँ तो स्वास्थ्य ठीक रहेगा।

 

(10) गरमी के दिनों में अन्य दिनों की अपेक्षा पानी का सेवन अधिक करना पड़ता है। अतः गरमी के दिनों में भोजन कम करें। दूंस-ठूसकर भोजन न करें।

(11) भोजन के तुरंत बाद 1 गिलास छाछ (जीरा भूनकर, सेंधानमक या काला नमक मिलाकर) पिएँ।

(12) सलाद के रूप में ककड़ी, पालक, खीरा, चुकंदर, टमाटर, धनिया, पत्तागोभी आदि का सेवन करने से शारीरिक गरमी को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

(13) हरे पुदीने की चटनी लू से बचाती है। इसका सेवन अवश्य करें।

(14) प्रकृति ने गरमी से बचने के लिए ही ग्रीष्मकाल में वे फल उपलब्ध कराए हैं, जिनमें पानी की मात्रा और खनिज लवणों तथा पोषक तत्त्वों की भरमार है। जैसे-तरबूज, लीची, रसदार देशी आम, अंगूर, जामुन, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, माल्टा, नीबू, संतरा, नारंगी आदि। इनका पर्याप्त सेवन करना चाहिए।

(15) प्रात: नाश्ते में अंकुरित अन्न का सेवन करने से सभी प्रकार के विटामिन्स की प्राप्ति होती है। गरमी भी कम लगती है। 50-50 ग्राम अंकुरित अन्न दिन में दो या तीन बार सेवन करना चाहिए।

(16) गरमी के दिनों में शरीर शीतल पेय की माँग करता है; ऐसे समय में कोल्डड्रिंकका प्रचलन मूर्खतापूर्ण है। चाय, काफी का सेवन भी न करें। सबसे बड़ी समझदारी यह होगी कि नीबू-पानी, आम का पना, दही की लस्सी, बेल का शरबत, चना और जौ का सत्तू गरमी से और गरमी के रोगों से बचाते हैं।

(17) दिन में 3-3 घंटे के अंतर से अपनी आँखों को ठंढे पानी से 4-5 बार छींटे मारते हुए ठंढक प्रदान करें।

(18) पेट को ठंढा रखने के लिए पेट पर सूती कपड़े की भीगी तौलिया 5 मिनट के लिए (भोजन के 3 घंटे बाद या प्रातः खाली पेट) रख सकते हैं।

युग निर्माण योजना, मई २०२१

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