A circus owner had a few monkeys in his circus. In order to feed the monkeys, he…
A circus owner had a few monkeys in his circus. In order to feed the monkeys, he…
गायत्री का पाँचवाँ अक्षर ‘तु’ आपत्तियों और कठिनाइयों में धैर्य रखने की शिक्षा देता है l आपत्तिग्रस्त होने पर भी प्रयत्न करना आत्मा का धर्म है। प्रयत्न की महिमा और प्रतिष्ठा अपार कही गई है ।”
मनुष्य के जीवन में विपत्तियाँ, कठिनाईयाँ, विपरीत परिस्थितियाँ, हानियाँ और कष्ट की घड़ियाँ आती ही रहती हैं । जैसे काल-चक्र के दो पहलू-काल और दिन हैं, वैसे ही संपदा और विपदा, सुख और दुःख भी जीवन रथ के दो पहिये हैं । दोनों के लिए ही मनुष्य को निस्पृह वृत्ति से तैयार रहना चाहिए । आपत्ति में छाती पीटना और संपत्ति में इतराकर तिरछा चलना, दोनों ही अनुचित हैं।
In a small village near a town, there lived some cowherds. Each one amongst them kept a…
Vivekanand was to go abroad. He went to mother Shardamani for her blessings. Mataji said-“First do one…
विवेकानंद विदेश जा रहे थे। वे माता शारदामणि के पास आशीर्वाद लेने पहुँचे। माताजी ने कहा—“पहले मेरा…
A king went wandering in a forest. He was very thirsty also. He saw an old man…
एक राजा जंगल में भटक गया। प्यास से आकुल-व्याकुल होकर वह इधर-उधर घूमने लगा। उसे एक झोंपड़ी…
Gandhiji was on a peace-keeping mission to Noakhali. He was meeting people and also consoling distressed persons.…
गांधी जी नोआखाली में शांति स्थापना के लिए भ्रमण कर रहे थे। पीड़ितों को सांत्वना भी देते।…