”Naimatma Pravachanen Labhyohah Na Medhaya Na Bahu Shruten.” Say the Upanishads: ”The Soul cannot be perceived by…
”Naimatma Pravachanen Labhyohah Na Medhaya Na Bahu Shruten.” Say the Upanishads: ”The Soul cannot be perceived by…
”Ishavasyamidam Sarvam Yatkincha Jagatyanjagat” That is, whatever exists in this world is pervaded by HIS omnipresence. So-hum …
”Indriyani Paranyahurindriyebhya Param Manaha. Manasastu Para Buddhiryo Buddheh Partastu Sah.” (Gita-3/42) ”Supreme beyond their objects are…
समायोजन है दो या अनेकों के बीच में बेहतर तालमेल। हम भी खुश रहें, आपकी भी खुशी…
जीवनमूल्यों का निर्माण मनुष्य की जीवनशैली एवं उद्देश्य के समन्वय से होता है। जीवन के लिए श्रेष्ठ…
वसंत के आगमन के साथ ही चारों ओर प्रकृति के सौंदर्य की चर्चा होने लगती है। मलय पवन की सुगंध से लता-कुंज महक उठते हैं। पीली सरसों से सुसज्जित खेतों की शोभा देखते ही बनती है। चारों ओर हरियाली और फूलों को देखकर ऐसा कौन सा जीव है जो झूमे बिना रह सकता है ? वसंत का स्वागत करने के लिए प्रकृति का अंग-अंग खिल उठता है। इसी कारण वसंत को ‘ऋतुराज’ की उपाधि दी गई है।
जीवन में अच्छे मित्रों को ढूँढ़ने की जितनी आवश्यकता होती है, उतनी ही आवश्यकता शत्रुओं को पहचानने…
जीवनीशक्ति का आधार है-शरीर का भली प्रकार स्वस्थ और सशक्त रहना तथा समस्त अंगों का अपना-अपना कार्य सहीतीर पर करते रहना। स्वास्थ्य के मुदव, रहने से ही सब प्रकार के कार्यों को ठीक तरह से कर सकने की क्षमता उत्पन्न होती है। मन प्रसन्न और उत्साहयुक्त रहता है। विचारों में संतुलन और स्थिरता रहती है और बुद्धि नए-नए तथा महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की ओर अग्रसर होती है। इस दृष्टि से विचार करने पर यह निश्चय हो जाता है कि स्वास्थ्य ही हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है जो व्यायाम इत्यादि से ही बनाए रखा जा सकता है।
मनुष्य जीवन को असीम संभावनाओं और क्षमताओं से युक्त कहा गया है। ‘यथा ब्रह्माण्डे तथैव पिण्डे’ के…
સાચો તપસ્વી કોણ?
તપસ્યા સાથે જેનામાં લોકસેવા અને લોકકલ્યાણની ભાવના હોય તેને જ સાચો તપસ્વી કહી શકાય.